
’’मनुश्य के बाद गाय ही पृथ्वी पर ऐसा प्राणी है जिसका Emotional Level सबसे उच्च है। इसीलिए 84 लाख योनियों के बाद मनुश्य जन्म से पहले गाय की योनि होती है। गाय के बाद ही मनुश्य जन्म आता है। प्रति प्रसव साधना के पष्चात् साधकों का भी यही अनुभव रहा है। गाय के समान कोई पवित्र जीव नहीं है। उसका गोबर भी Anti-Radiant होता है, मतलब की उस पर Radiations का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। मेरा मानना है कि अगर कहीं विस्फोट या Nuclear Fusion करते हैं, तो वहाँ अगर एक कमरे को अंदर और बाहर से गोबर से लीप दे तो उसपर Bomb Radiations का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। ग्रहणकाल में भी गाय का गोबर फायदेमंद होता है। इसीलिए गाय जब गर्भवती होती है तो ग्रहणकाल में गाय का गोबर उसी के पेट पर लगा देने से बच्चा सुरक्षित रहता है।’’
’’इसीलिए हम अपने ध्यान कक्षों को अंदर और बाहर की एक परत गाय के गोबर से लीप देते हैं, ताकि बाहर की टपइतंजपवदे अंदर न आ कर विचलित करें, और अंदर ध्यान से उत्पन्न पवित्र-दिव्य तरंगों का सुरक्षित कर उनका अधिक से अधिक लाभ उठाया जा सके, और वह आश्रम का कक्ष भी परम दिव्यता – पवित्रता से व्याप्त हो जाता है।’’
