
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार अष्विनी कुमार जुड़वाँ भाई थे और वे सदा साथ-साथ ही रहते थे। वे सर्वप्रथम आयुर्वेद का ज्ञान प्राप्त करने वाले माने जाते हैं। अपने औशधि ज्ञान और सके प्रयोग के कारण अष्विनी कुमार सदा स्वस्थ व सुंदर बने रहे। वे षल्य-क्रिया में भी निपुण थे और कटे अंग के स्थान पर नया अंग जोड़ देते थे।
उन्होंने वात-पित्त-कप तीन विकारों का ज्ञान संसार को कराया। उनके बताए मार्ग पर चलकर हमारे ऋशि-मुनियों ने तथा राम-कृश्ण-भीश्म जैसे महापुरूशों ने स्वस्थ व नीरोग जीवन प्राप्त किया था।
