“यदि हम भी ईष्वर को नहीं देख सकते तो कैसे जान सकेंगे कि मूसा ने ईष्वर का दर्षन किया था? यदि ईष्वर कभी किसी के समीप आये हैं, तो हमारे समीप भी आयेंगे। मैं एकदम उनके पास जाऊँगा, वे मुझसे बातचीत करेंगे। विष्वास को आधार रूप में मैं ग्रहण नहीं कर सकता – यह नास्तिकता और घोर ईष्वर निंदा मात्र है यदि ईष्वर ने दो हजार साल पहले अरब की मरूभूमि में किसी व्यक्ति के साथ वार्तालाप किया है, तो वे आज मेरे साथ भी वार्तालाप कर सकता हैं। यदि वे नहीं कर सकते तो हम क्यों न कहे कि वे मर गए हैं? जैसे भी हो ईष्वर के निकट आना ही चाहिए। किंतु आते समय किसी को ढकेलना मत।”
