Anshuman Bajpayee "Krishnamitra Ji" Secrets of India Spirituality Talks with Krishnamtraji

भगवान विष्णु एवं शंकर,स्वर्ग लोक देवता: उन सभी के मुख से दिव्य तेज प्रकट हुआ जिस तेज से एक नारी का सर्जन हुआ। जिन्हें “माँ भगवती दुर्गा ” कहा गया।

Devas creating A Divine Feminine Form who protects all of the beings: They call Her with respect and devotion “MAA DURGA”

माँ भगवती नें अत्याचारी असुरों का नाश करने हेतु कई अवतार लिए हैं। पुरातन काल में दुर्गम नाम का एक अत्यंत बलशाली दैत्य हुआ करता था। उसने ब्रहमा जी को प्रसन्न कर के समस्त वेदों को अपनें आधीन कर लिया, जिस कारण सारे देव गण का बल क्षीण हो गया। इस घटना के उपरांत दुर्गम नें स्वर्ग पर आक्रमण कर के उसे जीत लिया।और तब समस्त देव गण एकत्रित हुए और उन्होने देवी माँ भगवती का आह्वान किया और फिर देव गण नें उन्हे अपनी व्यथा सुनाई। तब माँ भगवती नें समस्त देव गण को दैत्य दुर्गम के प्रकोप से मुक्ति दिलाने का आश्वासन दिया।

माँ भगवती नें दुर्गम का अंत करने का प्रण लिया है, यह बात जब दुर्गम को पता चली तब उसने सवर्ग लोग पर आक्रमण कर दिया। और तब माँ भगवती नें दैत्य दुर्गम की सेना का संहार किया और अंत में दुर्गम को भी मृत्यु लोक पहुंचा दिया। माँ भगवती नें दुर्गम के साथ जब अंतिम युद्ध किया तब उन्होने भुवनेश्वरी, काली, तारा, छीन्नमस्ता, भैरवी, बगला तथा दूसरी अन्य महा शक्तियों का आह्वान कर के उनकी सहायता से दुर्गम को पराजित किया था।

इस भीषण युद्ध में विकट दैत्य दुर्गम को पराजित करके उसका वध करने पर माँ भगवती दुर्गा नाम से प्रख्यात हुईं।

माँ दुर्गा को अदि शक्ति, शक्ति, भवानी, और जगदम्बा जैसे कई नामों से पूजते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार माँ दुर्गा का जन्म राक्षसों का नाश करने के लिए हुआ था। यही कारण हैं कि हम नवरात्र में माँ दुर्गा की पूजा करते हैं। इन दिनों में माता की पूजा और भक्ति का फल जल्दी मिलता है। इसका कारण यह माना जाता है कि मां नवरात्र के नौ दिनों में पृथ्वी पर आकर भक्तों के बीच रहती हैं। इसलिए मां को खुश करने के लिए भक्त विधि-विधान पूर्वक आरती, पूजा एवं दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं।

महिषासुर का जन्म पुरुष और महिषी (भैंस) के संयोग से हुआ था। इसलिए उसे महिषासुर कहा जाता था। वह अपनी इच्छा के अनुसार भैंसे व इंसान का रूप धारण कर सकता था। उसने अमर होने की इच्छा से ब्रह्मा को प्रसन्न करने के लिए बड़ी कठिन तपस्या की। ब्रह्माजी उसके तप से प्रसन्न हुए। उन्होंने उसे आशीर्वाद दिया और इच्छानुसार वर मांगने को कहा।

महिषासुर ने उनसे अमर होने का वर मांगा। ब्रह्माजी ने कहा जन्मे हुए जीव का मरना तय होता है। महिषासुर ने बहुत सोचा और फिर कहा- आप मुझे ये आशीर्वाद दें कि देवता, असुर और मानव कोई भी मुझे न मार पाए। किसी स्त्री के हाथ से मेरी मृत्यु हो। ब्रह्माजी ‘एवमस्तु’ यानी ऐसा ही हो कहकर अपने लोक चले गए। वरदान पाकर महिषासुर ने तीनो लोकों पर आतंक मचा दिया। फिर उसने देवताओं के इन्द्रलोक पर आक्रमण किया। जिससे सारे देवता परेशान हो गए। तब सारे देवता मिल कर विष्णु भगवान एवं शंकर भगवान से सहाय मांगने उनके समक्ष गए। पूरी बात जान कर भगवान विष्णु एवं शंकर भगवान क्रोधित हो उठे। और तब उन सभी के मुख से दिव्य तेज प्रकट हुआ जिस तेज से एक नारी का सर्जन हुआ। जिन्हें “दुर्गा” कहा गया। असुर महिषासुर का वध करने के लिए शक्ति माँ नें दुर्गा का अवतार लिया था।

  • भगवान शिव के तेज से मुख बना।
  • यमराज के तेज से केश बने।
  • भगवान विष्णु के तेज से भुजाएँ बनी।
  • चंद्रमाँ के तेज से वक्ष स्थल की रचना हुई।
  • सूर्यदेव के तेज से पैरों की उँगलियों की रचना हुई।
  • कुबेरदेव के तेज से नाक की रचना हुई।
  • प्रजापतिदेव के तेज से दांत बने।
  • अग्निदेव के तेज से तीनों नेत्र की रचना हुई।
  • संध्या के तेज से भृकुटी बनी।
  • वायुदेव तेज से कानों की उत्पति हुई।

माँ दुर्गा के दिव्य रूप के सर्जन करने के बाद देव गण नें उन्हे इन शस्त्रों से शुशोभित किया।

  • भगवान विष्णु नें सुदर्शन चक्र दिया
  • भगवान शंकर नें त्रिशूल दिया।
  • अग्निदेव नें अपनी प्रचंड श्कती प्रदान की।
  • वरुणदेव नें शंख भेट किया।
  • इन्द्रदेव नें वज्र और घंटा अर्पण किया।
  • पवनदेव नें धनुषबाण दिये।
  • यमराज नें काल दंड अर्पण किया।
  • प्रजापति दक्ष नें स्फटिक माला अर्पण की।
  • भगवान ब्रह्मा नें कमंडल दिया।
  • सूर्यदेव नें असीम तेज प्रदान किया।
  • सरोवर नें कभी ना मुरझानें वाली कमल की माला प्रदान की।
  • पर्वतराज हिमालय नें सवारी करने के लिए शक्तिशाली सिंह भेट किया।
  • कुबेरदेव नें मधु से भरा एक दिव्य पात्र दिया।
  • समुद्रदेव नें माँ दुर्गा को एक उज्ज्वल हार, दो दिव्य वस्त्र, एक दिव्य चूड़ामणि, दो कुंडल, दो कड़े, अर्ध चंद्र, एक सुंदर हँसली एवं उँगलियों में पहन नें के लिए रत्न जड़ित अंगूठियां दी।

श्स्त्रो से सुसज्जित माँ दुर्गा नें असुर महिषासुर से भीषण युद्ध किया और उसे परास्त कर के उसका वध कर दिया। उसके पश्चात दुर्गा माँ नें स्वर्गलोक पुनः देवताओं को सौप दिया। कहा जाता है कि देवी का युद्ध महिषासुर से नौ दिनों तक चला था और नवे दिन माँ ने महिषासुर वध किया था। बलशाली असुर महिषासुर का हनन करने के बाद दुर्गा माँ महिषासुरमर्दिनी नाम से प्रसिद्धि हुईं।

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Anshuman Bajpayee "Krishnamitra"