Anshuman Bajpayee "Krishnamitra Ji"

ज्ञान

एक शिष्य ने एक दिन सूफी संत से पूछा:

“किसी गुरु की एक झलक पाकर ही उसके इर्दगिर्द जिज्ञासुओं का तांता लग जाता है जिन्हें गुरु से ज्ञान पाने की आस होती है. क्या यह अपने में कोई अवरोध या गतिरोध नहीं है? क्या ऐसा होने पर गुरु अपने मार्ग से भटक नहीं सकता? क्या यह संभव है कि गुरु को कभी यह खेद होता हो कि वह जिसे सिखाना चाहता है उसे नहीं सिखा पा रहा है?”

फिरोज़ ने कहा :

“पके हुए अमरूदों से लदे पेड़ को देखकर राहगीरों की भूख जाग जाती है. यदि कोई अपनी भूख से ज्यादा अमरुद खायेगा तो उसका पेट दुखने लगेगा. लेकिन उस व्यक्ति का पेट नहीं दुखा करता जिसके आँगन में अमरुद का पेड़ लगा होता है.

ऐसा ही कुछ हमारी ज्ञान की खोज के साथ भी होता है. रास्ता तो सबके लिए खुला है, लेकिन ईश्वर ने प्रत्येक जिज्ञासु के लिए पहले ही हद तय कर दी है.”

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Anshuman Bajpayee "Krishnamitra"