“सिद्धियों में से एक ‘कार्यसिद्धि’ भी होती है कि तुम जो करो वह सिद्ध हो जाए। पर ज्ञानमार्ग में एक जिसे ‘संकल्प सिद्धि’ भी है कि तुम सोचो और प्रभु उस पूरा करे, पर कार्यसिद्धि में सोचने पर, करना भी तुमको ही है।
एक ‘विचारसिद्धि’ भी है कि तुम जो विचार करो, किसी से कुछ मत बोलो, बस विचार करो और सामने वाले तक संदेश पहुंच जाए, परिस्थितियों का निर्माण हो जाए। टेलीपैथी इसी विचारशक्ति का छोटा सा रूप है। तुम जिस समय जहाँ पहँचना चाहो उस समय का विचार करो, चाहें जो हो, चाहे पैदल जाना पड़े, पर ठीक उसी समय तुम वहाँ पहुंच जाओगे, यह वैज्ञानिक बात है, इसी शक्ति को ‘विचार सिद्धि’ कहते हैं।”
“मनुश्य के बाद गाय ही पृथ्वी पर ऐसा प्राणी है जिसका Emotional Level सबसे उच्च है। इसीलिए 84 लाख योनियों के बाद मनुष्य जन्म से पहले गाय की योनि होती है। गाय के बाद ही मनुष्य जन्म आता है। साधना के पश्चात् साधकों का भी यही अनुभव रहा है। गाय के समान कोई पवित्र जीव नहीं है। उसका गोबर भी Anti-Radiant होता है, मतलब की उस पर Radiations का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। मेरा मानना है कि अगर कहीं विस्फोट या Nuclear Fusion करते हैं, तो वहाँ अगर एक कमरे को अंदर और बाहर से गोबर से लीप दे तो उसपर Bomb Radiations का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। ग्रहणकाल में भी गाय का गोबर फायदेमंद होता है। इसीलिए स्त्री जब गर्भवती होती है तो ग्रहणकाल में गाय का गोबर उसी के पेट पर लगा देने से बच्चा सुरक्षित रहता है।”
“इसीलिए आश्रमों में ध्यान कक्षों को अंदर और बाहर की एक परत गाय के गोबर से लीप देते हैं, ताकि बाहर की Vibrations अंदर न आ कर विचलित करें, और अंदर ध्यान से उत्पन्न पवित्र-दिव्य तरंगों को सुरक्षित कर उनका अधिक से अधिक लाभ उठाया जा सके, और वह आश्रम का कक्ष भी परम दिव्यता – पवित्रता से व्याप्त हो जाता है।” जय श्री कृष्णः